भजन् मञ्जरी
यह कवि ऋषभ विश्वकर्मा द्वारा रचित "भजन् मञ्जरी" है। इसमें ईश्वर के प्रति भजन् के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है। यह संपूर्ण भजन भक्ति रस में है, जिसमें ७० भजन् माला है । भजन् का प्रभाव बहुत बड़ा है, भजन् के माध्यम से ही ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है; एतएव ईश्वर की प्राप्ति हेतु इस भजन की रचना की है। भजन् के प्रभाव से क्या नहीं किया जा सकता? यह संपूर्ण संसार भजन् के प्रभाव से ही टीका है, ईश्वर को प्राप्त करने का माध्यम भजन् ही है; इसीलिए यही सब विचारधाराओं को मन में धारण करके इस भजन् को ७० माला रूपी भक्ति रस में पिरोया है। ताकि छोटे बड़े सभी लोग अपनी वाणी द्वारा इस भजन् को गाएं, सुनें, सुनाएं और ईश्वर की भक्ति कर सांसारिक मोह माया से मुक्ति प्राप्त कर लें। इस भजन् मञ्जरी का लक्ष्य यही है कि अपने जीवन में ईश्वर की भक्ति कर पुण्य का भण्डार भरलें । यह सभी छोटे-बड़े देवी-देवताओं और अन्य भजनों से सुसज्जित है, जो गुड़ के रस के समान मीठा और आनन्ददायक, मन के सभी विकारों को हर कर शान्ति देने वाला है।
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