एक छाता, दो दोस्त — भाग 2: आख़िरी पंद्रह दिन दूरी का इम्तिहान, दोस्ती का वादा लेखक: Sadique Mukhtar
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Monsoon खत्म हुआ, पर कहानी नहीं.इनाया को Delhi वापस जाना है. सिर्फ पंद्रह दिन बचे हैं. सामी रोता नहीं, प्लान बनाता है — रोज एक पुराना छाता ठीक करेंगे, उस पर एक याद पेंट करेंगे, और किसी ज़रूरतमंद को दे देंगे.पंद्रह छाते, पंद्रह यादें. आख़िरी दिन बचता है वही गुलाबी छाता, जिसके अंदर Mumbai का नक्शा बना है.CST platform पर अलविदा होता है, पर एक वादा रह जाता है — हर पहली बारिश, ठीक 4 बजे, दोनों अपना छाता खोलेंगे. एक Mumbai में, एक Delhi में.
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